पिता ने पूरी जिंदगी बेटी को पढ़ाने में निकाल दी, ससुराल ने दो माह में उसी बेटी की जान ले ली..
-------------------------------------पिता ने पूरी जिंदगी बेटी को पढ़ाने में निकाल दी, ससुराल ने दो माह में उसी बेटी की जान ले ली..
खाकी की अपराधियों से मिलीभगत की कार्यशैली अपराधियों के हौसले बुलंद व पिडितो को हताश करती है....
आखिर कब तक बेटियां चढ़ती रहेगी ससुराल की भेंट ????
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उस बाप का समाज से ,रिश्तों से और प्रशासन से विश्वास उठ जाता होगा,जब उसकी नन्ही सी परी जो उसके आंगन में चहकती थी, जिसे वह बड़े नाजों से पाल-पोस कर बड़ा करता है,जिसकी जिंदगी बनाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी उस पर लूटा देता है।उसी बेटी को एक दिन ससुराल अपनी जरूरतों के लिए निगल जाता है। बड़ी विडंबना की बात है कि सरकार और प्रशासन जितना जोर से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में लगा रहा है उतने ही जोर से बेटियों की आख़री चित्कार अब चारों ओर से हर व्यक्ति के कानों में गूंजती पड़ रही है सिवाय प्रशासन के, और इसमें जितना दोषी प्रशासन है उतना ही दोषी हमारा समाज है। हमारे द्वारा समाज में फैलाई गई महिलाओं को लेकर दहेज़ जैसी कुरुतियों ने बेटियों की जान इतनी सस्ती कर दी की चंद पैसों व छोटी सी बातें कब जान ले लेती है पता ही नहीं चलता है। तो वहीं दूसरी ओर बेरहमी का दुसरा रूप खाकी जो टूटे हुए परिवार को न्याय के लिए सर पटकने पर मजबूर कर देता है और न्याय भी नहीं होने देता है, शायद यही कारण है कि अपराधी तत्त्व के व्यक्ति आए दिन बेटियों को मोत के घाट बेख़ौफ़ होकर उतार देते हैं। हाल ही में पांच बेटियों के किसान पिता को जयपुर ग्रामीण के कालाडेरा थाने की पुलिस के सामने अपनी मृत बेटी के इंसाफ के लिए घिडघिडाहट का मामला सामने आया है। जिसमें पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जो पुलिस कल तक मामले में कई आरोपी मान रही थी, वहीं आज मामले में सिर्फ एक ही व्यक्ति को गुनाहगार मान मामले में से आरोपियों को निकालने में जुटी है। जानकारी के मुताबिक कालाडेरा थाना क्षेत्र के ग्राम बिहारीपुरा में रविवार को सुनिता ताखर की ससुराल में करंट लगने से मौत हो गई। सुनिता के कंरट लगने पर ससुराल वालों ने बराला हास्पिटल में एम्बुलेंस से पहुंचाया, जंहा पर उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मौके पर पहुंचे सुनिता के पीहर पक्ष ने मामला संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम की मांग की,जिस पर ससुराल पक्ष ने नाराजगी जाहिर की, वहीं अंततः सुनिता का पोस्टमार्टम किया गया, जंहा पर सुनिता की मौत करंट से ना हो कर गला दबाने से बताया गया। वहीं सूत्रों के मुताबिक जानकारी यह भी मिल रही है कि सुनिता की मौत हास्पिटल में लाने से लगभग 8 घंटे पहले ही हो चुकी थी। ससुराल पक्ष ने अपने आप को बचाने के लिए यह ड्रामा रचा, जिसमें एम्बुलेंस कर्मचारियों ने अपनी पूरी भूमिका अदा की।वंही पूरा मामला समझ सुनिता के पीहर पक्ष ने पुलिस को नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दी,और पुलिस अपने काम में लग गई।एक और सुनिता के पीहर पक्ष में मातम का माहौल बना हुआ था। तो दुसरी ओर ससुराल पक्ष अपने आप को बचाने की मुहिम में जुटे हुए थे। क्योंकि सुनिता की जेठानी रिसला ताखर उक्त गांव की मौजूदा सरंपच है, उसने अपने तार जोड़ने शुरू कर दिए। वहीं खाकी से न्याय की आस में बैठे पीहर पक्ष को अब खाकी पर ही पूरी उम्मीद थी कि उनकी बेटी को वहीं न्याय दिला पायेगी। लेकिन माना जा रहा है कि यह आस कुछ देर बाद ही टूट गई। सूत्रों के मुताबिक पुलिस अब पूरे मामले में सिर्फ एक महिला को ही आरोपी मान रही है, बाकी को सोमवार देर रात पुलिस ने उन्हें रिहा कर फिर अपनी कार्यशैली को सवालों के घेरे में डाल दिया है।जो पुलिस दो दिन पहले 2-3 आरोपी मामले में मान रही थी, वहीं पुलिस आज अभी तक मिलीभगत करने वाले एम्बुलेंस कर्मचारियों से पूछताछ तक नहीं कर रही है। और एक बार फिर पिडित अपनी बेटी के न्याय के लिए अब दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो जायेगा। आज सुनिता के पिता शायद यही सोच रहे होंगे कि पूरी जवानी अपनी बेटियों को पढ़ाने में निकाल दी और अब उसी बेटी के इंसाफ़ के लिए बुढ़ापे में पुलिस ठोकरें खाने को मजबूर कर देती है।
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